सब्सिडी क्या है

सब्सिडी (Subsidy) एक अंग्रेजी शब्द है। सब्सिडी का हिन्दी अनुवाद “राजसहायता” होता है। सीधे शब्दों में कहा जाय तो जो सहायता राजा की तरफ से मिलती है, उसे सब्सिडी कहते हैं। यह सहायता अर्थिक और सामाजिक दोनों होती है। वर्तमान दौर राजा का समय नहीं है बल्कि लोकतंत्र है। लोकतंत्र में सरकार से मिलने वाली सहायता को सब्सिडी कहा जाता है। सब्सिडी अधिकतर होम लोन और एमएसएमई कारोबारियों के लिए बिजनेस लोन पर मिलती है। इससे लाभार्थी को बड़ा लाभ होता है।

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सब्सिडी का अर्थ

सब्सिडी का शाब्दिक अर्थ वित्तीय मदद होता है। यह वित्तीय मदद सरकार द्वारा संबंधित क्षेत्र के लाभार्थीयों को मिलता है। सरकार द्वारा किसानों, उद्योगों, उपभोक्ताओं को समय – समय पर बिजनेस लोन और उपकरणों की खरीद करने पर सब्सिडी दिया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक सरकारें हर वर्ष करोड़ों रुपये सब्सिडी पर खर्च करती हैं। सब्सिडी का अर्थ इस उदारण से और सहज हो जाएगा। माना को उपकरण 50 हजार रुपये का है। अब सरकार उस उपकरण पर 20 हजार रुपये की सब्सिडी दे देती है तो उस उपकरण का वास्तविक मूल्य 30 हजा रुपये हो जाएगा। यह फायदा आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों को प्रदान किया जाता है।

सब्सिडी का प्रकार

सब्सिडी सिर्फ होम लोन, बिजनेस लोन और उपकरण की खरीद तक ही सिमित नहीं है। बल्कि इसके अलावा भी बहुत से सेक्टर में सब्सिडी प्रदान की जाती है। सब्सिडी का प्रकार निम्निलिखित है-

ब्याज सब्सिडी

सब्सिडी का यह प्रकार लोन से संबंधित है। एमएसएमई कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा तमाम योजनाओं का संचालन किया जाता है। इन योजनाओं में कारोबारियों को बिजनेस लोन सुविधा प्रदान की जाती है। चूंकि लोन पर ब्याज लागू होता है तो लोन की मूल राशि बढ़ जाती है। तो सरकार यह ऑफर देती है कि सब्सिडी के तौर पर बिजनेस लोन की ब्याज दर की रकम सरकार द्वारा चुकाया जाएगा। इससे यह फायदा होता है कि कारोबारी बेहिचक बिजनेस लोन का लाभ उठाता है और अपने कारोबार का विस्तार करता है और लोन की मूल रकम को चुका देता है।

किसानों के लिए सब्सिडी

भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। यहां की अधिकतर अबादी कृषि आय पर निर्भर है। ऐसे में सरकार द्वारा उर्वरक की खरीद पर सब्सिडी, कैश सब्सिडी, कृषि लोन पर ब्याज माफ़ी सब्सिडी, कृषि कार्य हेतु वाहन खरीद पर और अन्य उपकरण की खरीद पर सब्सीडी प्रदान किया जाता है।

फ़ूड सब्सिडी

सभी के लिए भोजन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए सस्ते दामों पर खाद्यान्न (चावल, गेहूं, चीनी) मुहैया कराया जाता है। इसे फूड सब्सिडी कहते हैं। यह सुविधा गरीबों को लिए होती है।

तेल/ईंधन सब्सिडी

पहले किरोसीन का तेल 10 रुपये या 12 रुपये लीटर मिलता था। लेकिन उस तेल की वास्तविक कीमत 50 से 60 रुपये लीटर होती है। लेकिन सरकार द्वारा उसपर सब्सिडी दी जाती थी ताकि सभी के घरों में उजाला हो सके। इसी के साथ रसोई गैस पर भी सब्सिडी दी जाती है।

टैक्स सब्सिडी

बड़े उद्योग घरानों से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। तथा उनके सीएसआर फंड से गरीब लोगों का कल्याण किया जाता है। कभी – कभी इन उद्योग घरानों पर बहुत अधिक कर्ज हो जाता है। तो उन्हें कर्ज से उबारने के लिए सरकार उन्हें टैक्स सब्सिडी का लाभ प्रदान करती है। जिस वर्ष टैक्स सब्सिडी प्रदान किया जाता है, उस वर्ष उद्यमियों को टैक्स के रुप में मामूली राशि जमा करना होता है।

धार्मिक सब्सिडी

इसे इस प्रकार समझें कि हज यात्रा और अमरनाथ यात्रा के लिए लाखों रुपये खर्च होता है लेकिन लाभार्थी को सरकार से आर्थिक सहायता मिल जाती है, जिससे यह खर्च कम हो जाता है। उदाहरण के तौर पर देखें तो वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह घोषणा की गई है कि अमरनाथ यात्रा पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी प्रदेश सरकार द्वारा दी जाएगी।

सब्सिडी देने का उद्देश्य

बहुत साफ उद्देश्य होता है कि इससे सभी का भला हो सके। कतार के प्रथम व्यक्ति से लेकर अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली आ सके। औपचारिक तौर पर सब्सिडी प्रदान करने के से देश को निम्नलिखित लाभ मिलता है-

कुल मिलाकर देखा जाय तो सब्सिडी कार्यक्रम से देश के बहुत सारे लोगो को सहायता मिलती है। एमएसएमई कारोबारियों को अपने बिजनेस का संचालन करने में आसानी होती है, किसानों को किसानी करने में सहायाता मिलती है और उपकरणों की खरीद मुमकिन हो जाती है और लोन भी सस्ता मिल जाता है। इसके साथ ही गरीब वर्ग को लोन भी मुख्य धारा से जुड़ जाते हैं।

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